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उत्तराखंड

कभी बेचते थे फ्री में दवाई आज करोड़ों में खेलते हैं बाबा रामदेव, ऐसे चमका पतंजलि कारोबार

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पतंजलि इस नाम से आज भारत का हर व्यक्ति भलिभांति परिचित है, कोरोनाकाल हो या चाहे कोई अन्य राजनीतिक मुद्दा पतंजलि किसी ना किसी तरह से मामले से जुड़ ही जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं पतंजलि यहां तक कैसे पहुंचा, इसकी शुरुआत कैसे हुई थी। आज हम आपको पतंजलि के इतिहास के बारे में पूरी जानकारी देंगे। हम पतंजलि की बात करें और बाबा रामदेव का जिक्र ना हो ऐसा नहीं हो सकता है।

राम कृष्ण यादव से बाबा रामदेव

बाबा रामदेव का जन्म 26 दिसंबर 1965 को हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले में सैयद अलीपुर कस्बे के नांगल चौधरी में हुआ। उनका असल नाम राम कृष्ण यादव है। बाबा रामदेव ने खानपुर गांव के गुरुकुल में आचार्य प्रदयुम व योगाचार्य बलदेव से वेद संस्कृत में योग शिक्षा प्राप्त की थी। युवावस्था में बाबा रामदेव ने संन्यास लेने का फैसला कर लिया था। संन्यास लेने के बाद ही राम कृष्ण यादव बाबा रामदेव बने।

फ्री में दवा बांटकर शुरू किया पतंजलि

रामदेव ने पतंजलि आयुर्वेद की स्थापना साल 2006 में की। बताया जाता है कि इसकी असल शुरुआत साल 1995 में हो गई थी। साल 1995 से 1998 तक बाबा रामदेव बाजार से औषधि और मसालों को खरीद कर दवाई बनाया करते थे। इसके साथ ही वह दवाई बनाकर लोगों को मुफ्त बांटा करते थे। वह लोगों को आयुर्वेद की तरफ ले जाना चाहते थे।

हरिद्वार से पूरे भारत में मशहूर हुआ पतंजलि

हम जानते हैं कि पतंजलि आयुर्वेद आज देश का जाना माना नाम है। पतंजलि आयुर्वेद की औद्योगिक इकाई का हेड क्वार्टर आज उत्तराखंड के हरिद्वार में स्थित है। इस हेडक्वार्टर को बाबा रामदेव और उनके शिष्य बालकृष्ण चलाते हैं। पतंजलि का उद्देश्य है कि लोगों को सस्ता शुद्ध उत्पाद दिया जा सके। इसके साथ ही पतंजलि का दूसरा उद्देश्य किसानों को रोजगार देना और लोगों को शुद्ध और आयुर्वेद की दवाई बनाकर स्वस्थ रखना है।

कई क्षेत्रों में काम करता है पतंजलि

आज पतंजलि कई विभागों में अपना काम करता है। इसके साथ ही कई क्षेत्रों में उनके उत्पाद आज बाजार में उपलब्ध है। सबसे पहले बात करें पतंजलि हैल्थ केयर की तो पतंजलि हैल्थ केयर आज अपने उत्पादों से बाजार में कई बड़ी कंपनियों को सीधी टक्कर दे रहा है। हेल्थ केयर में घी शहद आदि जैसे सामान पतंजलि लोगों को उपलब्ध करवा रहा है।

इसके अलावा पतंजलि किराने का सामान भी बाजार में उपलब्ध करवा रहा है। दाल चीनी चावल गुड़ आदि जैसे सामानों से पतंजलि ने बाजार में अच्छी पकड़ बनाई हुई है।

इन दोनों के अलावा बात करें तो पतंजलि आयुर्वेदिक दवाइयां आज बाजार में अपनी पकड़ बना चुकी है। आयुर्वेदिक दवाइयों के माध्यम से बाबा रामदेव की पतंजलि मोटा मुनाफा हर साल कमाती है। इसके साथ ही बाबा रामदेव की पतंजलि ब्यूटी प्रोडक्ट भी बाजार में उपलब्ध करवाती है।

कई लाख कर्मचारियों के साथ करोड़ो का व्यापार

पतंजलि में आज कई लाख कर्मचारी काम करते हैं। इसके अलावा हर साल पतंजलि औसतन 2500 करोड़ रुपये का टर्नओवर करती है। पतंजलि 46 तरह के कॉस्मेटिक उत्पादों को बाजार में उपलब्ध कराती है।

कई कंपनियों को सीधी टक्कर

पतंजलि को लेकर भारत के लोगों की राय अलग-अलग रहती है। कई लोगों का कहना है कि बाबा रामदेव सत्ताधारी पार्टी के समर्थन करते हैं इसलिए वह हर साल इतना बड़ा मुनाफा कमाते हैं। इसके अलावा बाबा रामदेव ने पिछले दिनों बीजेपी शासित राज्यों में जमीन लेकर भी अपना व्यापार आगे बढ़ाने को लेकर प्लान तैयार किया था जिसको लेकर भी विपक्षी दलों ने बाबा रामदेव पर हमला बोला था।

लेकिन इन सबके बीच एक तथ्य पर ध्यान दें तो पतंजलि के प्रति जरूर लोगों की अपनी अपनी राय हो सकती है लेकिन पतंजलि आयुर्वेद आज कई बड़ी और विदेशी कंपनियों को सीधी टक्कर दे रहा है। हिमालया व जॉनसन एंड जॉनसन आदि जैसी कंपनियों को बाबा रामदेव की पतंजलि आज बाजार में सीधी टक्कर देती है।

विदेश में ले जाना चाहते हैं व्यापार

बाबा रामदेव की पतंजलि आयुर्वेद विदेश में भी अपना व्यापार लगाना चाहती है। वहीं भारत के कई राज्यों में बाबा रामदेव अपने व्यापार को बढ़ाने की तैयारियां कर चुके हैं। इसके अलावा बाबा रामदेव कई बार कह चुके हैं कि वह विदेश में भी पतंजलि और भारत की शुद्ध चीजों का प्रचार-प्रसार करना चाहते हैं।

बाबा रामदेव की पतंजलि आज देश में उभरती हुई कंपनियों में से एक हैं और लगातार जिस तरीके से हर साल बाबा रामदेव को मुनाफा हो रहा है उसे देखकर अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि पतंजलि आने वाले समय में भारत के बाजार पर पूरी तरीके से कब्जा कर सकती है।

   
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