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पश्चिम बंगाल

बाइक वाले एंबुलेंस दादा ने बचाई 5000 से ज्यादा लोगों की जिंदगियां,पद्मश्री करीमुल हक की कहानी

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आज हम आपको कहानी बताएंगे बाइक वाले एंबुलेंस दादा की। बाइक वाले दादा उनका नाम क्यों पड़ा, साथ ही वह ऐसा क्या करते हैं जो लोग उन्हें इस नाम से पुकारते हैं। सबसे पहले हम बात आपको बता ही तो बाइक वाले दादा का पूरा नाम करीमुल हक है जो पश्चिम बंगाल के रहने वाले है। वह चाय के बागान में काम करते हैं। करीमुल हक बाइक पर बैठाकर आसपास के क्षेत्रों के लोगों को अस्पताल पहुंचाने का काम करते हैं। उन्होंने अपनी बाइक को एंबुलेंस का आकार दिया है।

बाइक के साथ उन्होंने एक साइड सिटींग कार लगाकर के एंबुलेंस जैसी व्यवस्था बनाई हुई है। बाइक वाले दादा करीमुल हक के मन में यह विचार साल 1995 के बाद आया था। साल 1995 में उनकी मां का निधन हार्टअटैक से हो गया था। मां को अस्पताल ले जाने के लिए सही समय पर एंबुलेंस नहीं मिल पाई थी। जिसके बाद करीमुल हक ने यह मन में प्रण किया कि एंबुलेंस की वजह से किसी की मौत नहीं होने देंगे। साल 1998 से वह लगभग 20 से ज्यादा गांव में यह काम कर रहे हैं।

अब तक बचाई कई हजार जान

साथी आपको बताएं तो करीमुल हक ने अब तक 5000 से ज्यादा जान बचा ली है। उन्होंने डुआर्स इलाके में भी जाकर लोगों की सेवा की है। इस इलाके में बिजली सड़क के साथ मूलभूत सुविधाएं भी नहीं हैं। लेकिन बाइक वाले दादा ने जाकर यहां भी लोगों की जान बचाई है। करीमुल हक बताते हैं कि अस्पताल लगभग 40 से 45 किलोमीटर की दूरी पर है। वह लोगों को बाइक पर बैठाकर वहां तक पहुंचाने का कार्य करते है।

मोदी ने लगाया गले

साथ ही आपको बताएं तो करीमुल हक को भारत सरकार द्वारा उनके बेहतरीन कार्य के लिए साल 2017 में पद्मश्री से नवाजा गया था। भारत के चौथे सबसे सर्वोच्च नागरिक सम्मान से 2017 में उन्हें नवाजा गया था। वहीं इस साल है नरेंद्र मोदी जब बंगाल विधानसभा चुनाव में चुनावी रैली करने के लिए बागडोगरा हवाई अड्डे पर पहुंचे थे। तब करीमुल हक नरेंद्र मोदी से मिलने पहुंचे थे, प्रधानमंत्री मोदी ने करीमुल हक को देखते ही गले लगाया था।

वही बताएं तो पत्रकार बिस्वजीव झा ने करीमुल हक की जीवनी के ऊपर एक किताब लिखी है। उन्होंने किताब का शीर्षक बाइक एंबुलेंस दादा, द इंस्पिरिंग स्टेय ऑफ करीमुल हक,द मैन हु सेव्ड 4000 लाइफ ।

   
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